स्थूलता या गति.. Do you want transformation..
हम शरीर से एक स्थूल काया हैं और मन विचारों से और अधिक स्थूलता को ग्रहण कर सकते हैं
मन विचारों की स्थूलता हमें आस पास के लोगों ,कर्मों से मिलती है
शरीर की स्थूलता हमें,जहां रहते हैं उस जगह की भौगोलिकता,खान पान और वातावरण से मिलती है ।
हम आज जो स्थिरता को महसूस करते हैं,कभी अपने को बंधा महसूस करते हैं या फंसा समझते हैं वो हमारे मन विचारों की या शरीर की या आस पास के लोगों की, वातावरण में फंस जाने से पैदा हुई स्थूलता ही तो है।
हम कैसे बदलें इन चीजों को
अगर हम बदलना चाहते हैं अपने को,अपने आस पास को तो हमें अपने ऊपर कुछ काम तो करना होगा
तो समझिए हम कैसे बदलें
मन और शरीर दोनों एक दूसरे पर प्रभाव डालते रहते है और हमारी और हमारे कर्मों की गति को कम या बढ़ाते रहते हैं
ज्यादा सोच गति कम कर स्थूलता को बढ़ा देते हैं और हमारे विचार और व्यवहार को ,पत्थर की तरह कठोर कर देते हैं,हमारे को अत्यधिक नियमों में बांध देते हैं
यहां तक कि हम औरों को भी अपने जैसा बनना शुरू कर देते हैं,उनके ऊपर अपनी सोच और नियमों को लादना शुरू कर देते हैं , उनके जीवन की गति में रुकावट डालना शुरू कर देते हैं जैसे एक शिला नदी के प्रवाह को बांधने की कोशिश करती है,दिशा मोड़ती रहती है
हमारी स्थूलता हमें पत्थर की तरह कठोर कर देती है, भारी कर देती है,एक ही तरह की सोच में बांध कर हमारी गति रोक देती है
क्या हमें एक शिला की तरह रुक कर,जीवन प्रवाह में स्थिर और मौन रह कर चुपचाप बंधा रह कर जीवन व्यतीत करना चाहिए
या
अपनी सोच को बदलता रहना चाहिए और नए स्थानों,नए विचारों और कर्मों के अनुभवों से समय के ऊपर नीचे हुए प्रवाह में सब के साथ गति बढ़ा कर सब के साथ ,नई पुरानी पीढ़ियों के साथ मिल कर जिंदगी जीना चाहिए
हां अगर आप के साथ और भी पत्थर फंस गए हों या आप उन में अटक गए हों तो अपने अंदर से ,योगी बन,अंतर साधना के उपजे विचारों के पानी को,जल सोते को, फव्वारे को,तेज जल धारा को जन्म दे ,समय के उड़ते बीजों को पकड़ कर पेड़ पौधों ,घास से सबके पत्थर को जड़ों के आगमन से तोड़ने और बाकी पत्थरों को तोड़ने में मदद कर सकें ,सबको गति दे सकें
अब हमें पत्थर बनना है
या एक जगह ही उगा बंधा भारी पेड़
या ठहरे तालाब का पानी जिसमें विचारों का ,सोचों का कूड़ा फंसा हो
या निर्मल नदी का बहता जल
यह हमारे को ही तो समझना है या बनना है
और यही तो स्थूलता की या गति की पहचान है
Keep Transforming yourself as you wish,it's in your hands and thoughts to become what you want
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